सोमवार, 17 मार्च 2025

संस्था 'पहरा' का संवैधानिक गीत


हर इंसान के हक़ की रक्षा, यही हमारा संकल्प है,

न्याय, समता, गरिमा, स्वतंत्रता – संविधान का मंत्र है।

पहरा बनकर हम खड़े हैं, अन्याय के हर द्वार पर,

सच की लौ जलाते रहेंगे, अधिकार के संसार पर।।

रंग-जाति, धर्म-भाषा, भेदभाव को तोड़ दो,

मूल अधिकार सबके अपने, ये बात दिलों में जोड़ दो।

जीने का अधिकार मिले, सम्मान से हर व्यक्ति जिए,

शिक्षा, श्रम, स्वाभिमान से, हर भारतवासी बढ़े।।

स्वतंत्रता विचारों की, कोई ना रोके जुबान,

संविधान का हर अनुच्छेद, बनता न्याय की पहचान।

रोटी, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य – सबका हक़ समान हो,

भ्रष्ट तंत्र की बेड़ियों को, अब तोड़ने का अभियान हो।।

हम हैं पहरा, हम हैं प्रहरी, सत्य की रखवाली हैं,

हर अन्यायी ताक़त के आगे, दीवार ये हमारी है।

लोकतंत्र की नींव मज़बूत हो, क़ानून का सम्मान बढ़े,

हर नागरिक हो सशक्त यहाँ, अधिकारों की पहचान बढ़े।।

आओ मिलकर संकल्प करें, हर हक़ को दिलाएंगे,

न्याय, बंधुता, समता, स्वतंत्रता का दीप जलाएंगे।

संविधान के आदर्शों को, जीवन में अपनाएंगे,

हम हैं पहरा, हम हैं प्रहरी, यह मिशन कभी ना रुकने पाए।।



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