न्याय, समता, बंधुता का, दिया जलाया
आपने,
शोषितों के दर्द
को, स्वर में गाया आपने।
बनाया जो
संविधान, वो राह दिखाएगा,
हर जन को उसका
अधिकार दिलाएगा।।
जाति-धर्म की
बेड़ियाँ, जो तोड़ी आपने,
शिक्षा, श्रम और सम्मान की, बात जोड़ी आपने।
संविधान की
रोशनी, हर दिल में बसाएंगे,
बाबा साहब के
सपनों को, साकार बनाएंगे।।
हम सब एक समता
के प्रहरी बन जाएंगे,
न्याय-अधिकार की
अलख जगाएंगे।
भेदभाव की
जंजीरों को, अब हम नहीं मानेंगे,
संविधान की शपथ
लेकर, आगे बढ़ते जाएंगे।।
14 अप्रैल का ये दिन, हमें याद दिलाएगा,
बाबा साहब का
संदेश, जग में गूंजाएगा।
चलो मिलकर हम सब, यह प्रण उठाएंगे,
संविधान के
आदर्श को, जीवन में अपनाएंगे।।
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